
नई दिल्ली, 07 जनवरी। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत सभी राज्यों से वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने समुदाय-आधारित मल कीचड़ प्रबंधन (एफएसएम) मॉडल की खूब तारीफ की।
मंत्री ने कहा, “शौचालय बनाना ही काफी नहीं, उसे सुरक्षित खाली करना, ट्रीट करना और रीयूज करना जरूरी है।” ओडिशा के खोरधा जिले में ट्रांसजेंडर समूह द्वारा चलाए जा रहे फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) को सबसे प्रेरक उदाहरण बताया, जहां सफाई के साथ रोजगार भी पैदा हो रहा है।
राज्यों के सफल मॉडल
संवाद में कई राज्यों के इनोवेटिव प्रयास हाइलाइट हुए:
• गुजरात (डांग जिला): आदिवासी इलाकों में बड़े स्तर पर ट्विन-पिट शौचालय।
• सिक्किम (मंगन जिला): सिंगल-पिट को ट्विन-पिट में कन्वर्जन।
• मध्य प्रदेश (इंदौर-कालीबिल्लौद): देश का पहला ग्रामीण एफएसटीपी, जहां ट्रीटेड पानी से मछली पालन और एमआरएफ सेंटर।
• कर्नाटक (दक्षिण कन्नड़): एसएचजी द्वारा क्लस्टर एफएसटीपी का रखरखाव।
• लद्दाख (लेह): ठंडे इलाकों के लिए इकोसैन शौचालय।
• त्रिपुरा (गोमती): एसएचजी द्वारा मोबाइल बायो-टॉयलेट, जो सेल्फ-सस्टेनेबल।
जलशक्ति राज्यमंत्री वी सोमन्ना, सचिव अशोक केके मीणा, मिशन निदेशक ऐश्वर्या सिंह सहित जिला कलेक्टर, पंचायत सदस्य और एसएचजी प्रतिनिधि शामिल हुए।
मंत्री पाटिल ने जोर दिया कि एफएसएम की सफलता पंचायत, एसएचजी और लोकल तकनीक पर निर्भर है। ये मॉडल साबित करते हैं कि गांव शहरों से पीछे नहीं।

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