vijaya-ekdashi-vrat-katha

विजया एकादशी 2026: भगवान विष्णु को समर्पित यह पावन व्रत राम जी ने किया था, जानें व्रत कथा

Spread the love

 

विजया एकादशी, हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, आज 13 फरवरी को मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि से ठीक पहले आने वाला यह शुभ त्योहार भगवान राम से जुड़ा हुआ है। राम ने माँ सीता को वापस लाने और समुद्र पार करने के लिए इस एकादशी का व्रत किया था। विजया एकादशी का सीधा संबंध भगवान राम से है।

विजया एकादशी व्रत कथा क्या है?

 

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से इस एकादशी के महत्व के बारे में पूछा। कृष्ण ने बताया कि इस व्रत की महिमा ब्रह्मा ने ऋषि नारद को सुनाई थी। उन्होंने कहा कि यह व्रत अत्यंत पुण्यकारी है और सबसे कठिन परिस्थितियों में भी विजय दिलाता है।

 

 

त्रेता युग में जब रावण ने सीता का हरण कर लंका ले गया, तो राम अपने वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुँचे। विशाल सागर को पार करना असंभव लग रहा था। लक्ष्मण ने सुझाव दिया कि पास के ऋषि से मार्गदर्शन लें। ऋषि ने राम को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस व्रत की आध्यात्मिक शक्ति सभी बाधाएँ दूर कर देगी।

 

लक्ष्मण के कहने पर राम भक्तदलभ्य 

ऋषि के पास गए, जिन्होंने उन्हें विजया एकादशी के विधि-विधान सिखाए। राम और उनकी सेना ने पूर्ण भक्ति से व्रत किया। इस व्रत के पुण्य से समुद्र पार हुआ, रावण का वध हुआ और सीता की मुक्ति संभव हुई। तभी से यह एकादशी ‘विजया’ एकादशी कहलाई—विजय की एकादशी।

 

 

इसलिए, जो भक्त श्रद्धा से विजया एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें इस लोक में विजय और परलोक में अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *