नई दिल्ली। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान-हितैषी बताया, जिसमें देश के हितों का पूरा ख्याल रखा गया। साझा बयान जारी होने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियामकों के लिए भी फायदेमंद है।
अमेरिका को प्रौद्योगिकी का प्रमुख पार्टनर मानते हुए गोयल ने कहा कि वर्तमान 100 अरब डॉलर का आयात कम है—एआई, डेटा विस्तार, विनिर्माण और खनिज प्रसंस्करण के लिए हाई-टेक मशीनरी जरूरी है।आज 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर की बनेगी।
भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिलेगी—18% शुल्क के मुकाबले चीन पर 35% तक। 500 अरब डॉलर की अमेरिकी खरीद पर गोयल बोले, “यह मामूली है; हमारा मौजूदा 300 अरब डॉलर आयात 5 सालों में दोगुना हो सकता है, जिसमें बोइंग-लॉकहीड जैसे सौदे शामिल।”पशुपालन को बल मिलेगा—डीडीजीएस (सूखा पशु आहार) पर कोटा-रियायत से उच्च प्रोटीन आयात सस्ता होगा।
बाजार संतुलित खुला: डेयरी, जीएम फसलें, मांस, मुर्गी, सोया-मक्का पर कोई छूट नहीं। कुछ दालों पर सीमित पहुंच से किसान 50-55 अरब डॉलर के कृषि निर्यात बढ़ाएंगे। दो पेज के बयान से भ्रम न फैलाएं—पूर्ण दस्तावेज बन रहा है, सुरक्षा कायम रहेगी।


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