
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई ने एक और बड़ा झटका दिया है। खैरागढ़ जिले के बकरकट्ठा थाना क्षेत्र में कुम्ही गांव के पास कुख्यात नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी ने अपने 11 साथियों के साथ हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। रामधेर, जो CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य थे और हिडमा जैसे खूंखार कमांडर के रूप में मशहूर थे, उनके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था।ये सभी महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (MMC जोन) के उच्च स्तरीय कैडर थे। सरेंडर करने वालों में शामिल हैं:
- रामधेर मज्जी (CCM) – AK-47
- चंदू उसेती (DVCM) – 30 कार्बाइन
- ललिता (DVCM) – कोई हथियार नहीं
- जानकी (DVCM) – INSAS
- प्रेम (DVCM) – AK-47
- रामसिह दादा (ACM) – 303 राइफल
- सुकेश पट्टम (ACM) – AK-47
- लक्ष्मी (PM) – INSAS
- शीला (PM) – INSAS
- सागर (PM) – SLR
- कविता (PM) – 303 राइफल
- योगिता (PM) – कोई हथियार नहीं
पुलिस को इनके पास से AK-47, INSAS, SLR, कार्बाइन और 303 राइफलें समेत भारी मात्रा में घातक हथियार मिले। MMC जोन में इनका गहरा दबदबा था, और उनके सरेंडर के बाद इस जोन को आधिकारिक रूप से नक्सल-मुक्त घोषित कर दिया गया। कुल 2 करोड़ 95 लाख रुपये के इनामी इन नक्सलियों ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर माओवादी हिंसा और शोषण से तंग आकर मुख्यधारा का रास्ता चुना। दशकों पुराने नक्सल गढ़ MMC जोन पर ये सरेंडर नक्सल-विरोधी अभियान की बड़ी सफलता है।


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