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दिव्यांग बुधराम साहू की प्रेरणादायक कहानी: 70% अक्षमता के बावजूद उद्यमी बने, मासिक 15,000 कमाते!

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महासमुंद , 6 जनवरी। जिले के लखनपुर गांव के बुधराम साहू (70%)—अस्थि बाधित दिव्यांग हैं, लेकिन हार मानना उनका स्वभाव नहीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की।
समाज कल्याण विभाग ने 19 सितंबर 2024 को उन्हें मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल दी। अब वे आसपास के गांवों में साग-सब्जी, मशरूम और इमली चॉकलेट बेचते हैं—परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई। 2011 में 95,000 का ऋण से मुर्गी पालन शुरू किया, जो समय से पहले चुका दिया। शासन ने ब्याज सब्सिडी लौटाई।
आज 40 बत्तख, 80 देशी मुर्गियां पालते हैं। अंडों को हैचरी से चूजे बनाते हैं—मासिक 15,000 की कमाई! हाल ही 50,000 का नया ऋण मिला, जिससे बकरी पालन भी जोड़ा। मुर्गी-बकरी फार्मिंग से बुधराम अब सफल उद्यमी हैं।
शासन योजनाओं की जीती-जागती मिसाल—दिव्यांग भाइयों के लिए प्रेरणा!

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