images (22)

छत्तीसगढ़ की धान खरीदी ने रचा इतिहास: 141 लाख टन+ रिकॉर्ड, किसानों का विश्वास चरम पर—महासमुंद नंबर 1

Spread the love

 

रायपुरखरीफ 2024-25 की धान खरीदी समाप्त, जो आंकड़ों से साबित रिकॉर्ड साबित हुई। मार्कफेड के अनुसार, 27.43 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया, 25.24 लाख+ ने बेचा—किसानों का सरकारी तंत्र पर गहरा भरोसा दिखा। कुल 141 लाख टन+ धान खरीदा गया, पिछले वर्षों से कहीं ज्यादा। यह न सिर्फ उत्पादन वृद्धि दर्शाता है, बल्कि खरीदी व्यवस्था की मजबूत पहुंच भी। समय पर भुगतान, डिजिटल ट्रैकिंग व मोहलत ने ग्रामीण-शहरी किसानों को जोड़ा। बड़े शहरों के किनारे वाले किसान भी सक्रिय रहे, जो खरीदी का दायरा बढ़ाने का संकेत

टॉप जिलों का जलवा:

महासमुंद शीर्ष पर—1.01 करोड़ टन+ खरीदी, 1.60 लाख+ पंजीकृत, 1.49 लाख विक्रेता। जिले ने उत्पादन व खरीदी दोनों में लीडरशिप दिखाई। बेमेतरा दूसरा—86 लाख टन+, 1.65 लाख पंजीकृत, 1.55 लाख ने बेचा। बलौदाबाजार तीसरा—79 लाख टन, 1.57 लाख+ विक्रेता। बालोद ने 70 लाख+, बिलासपुर 67 लाख+ के साथ टॉप-10 में जगह बनाई। रायपुर व राजनांदगांव जैसे शहरी जिलों ने साबित किया कि आधुनिकीकरण के बीच खेती मजबूत। टॉप-10 से 13.51 लाख किसान जुड़े, लेकिन अन्य जिलों का योगदान भी उल्लेखनीय—छोटे-बड़े किसानों की व्यापक भागीदारी। डिजिटल पोर्टल ने पंजीकरण से बिक्री तक सब आसान किया।

 

आदिवासी अंचलों की कहानी: बस्तर संभाग ने साबित किया कि दुर्गम इलाकों में प्रगति संभव। बस्तर—28 लाख टन+, 40,000+ किसान। कोंडागांव, कांकेर, सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा व बीजापुर से हजारों ने बेचा। बीजापुर में 17,000+ विक्रेता—नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच का प्रमाण। सड़क-केंद्र उन्नयन ने इसे संभव बनाया।

 

अतिरिक्त मोहलत का कमाल: 31 जनवरी बाद 5-6 फरवरी की छूट से 91,412 टन बिक्री—पहला दिन 38,553 टन, दूसरा 52,875 टन। किसानों ने आखिरी मौके का पूरा इस्तेमाल किया, जो लचीलापन की मिसाल।

 

भुगतान में रफ्तार: 30,000 करोड़+ पहुंचा खातों में, 48 घंटे का वादा पूरा। 6 फरवरी का शेष अगले दिन, MSP का 3,100 रुपये/क्विंटल अंतर इस महीने। कुल आंकड़े—27.53 लाख+ पंजीकृत, 32 लाख हेक्टेयर+ रकबा, 1410 लाख क्विंटल+ बिक्री। इससे ग्रामीण बाजार चहक उठे—व्यापार, रोजगार व स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती। किसान परिवारों में नकदी प्रवाह से उपभोग बढ़ा, छोटे कारोबार फले।

 

आगे की राह: यह खरीदी सिर्फ संख्या की जीत नहीं—किसान-सरकार साझेदारी की मिसाल। समयबद्ध नीतियां, पारदर्शिता व राहत ने भरोसा जगाया। महासमुंद से बस्तर तक एकता। आने वाले सीजन में डिजिटल化, स्टोरेज व निर्यात पर फोकस से और रिकॉर्ड बनेंगे, प्रदेश को धान हब बनाने की ओर कदम।

 

 

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *