अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 500% तक टैरिफ लगाने के संकेतों ने वैश्विक और घरेलू व्यापारिक हलकों में भूचाल ला दिया। शेयर बाजार पर सीधा असर पड़ा – पिछले 5 सत्रों में सेंसेक्स 2000 अंक तक गिर चुका, निफ्टी में 2% से ज्यादा की कमजोरी दर्ज हुई।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ लबोलुआब कर कहा कि देश किसी दबाव में नहीं झुकेगा। सरकार ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक बाजारों पर नजर रखे हुए है। राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
RBI डेटा: रिजर्व पर वैश्विक तनाव का गहरा असर
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 जनवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9.81 अरब डॉलर टूटकर 686.80 अरब डॉलर रह गया। एक सप्ताह पहले 3.29 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के बाद यह 696.61 अरब डॉलर पर पहुंचा था। वैश्विक अनिश्चितता ने रिजर्व को सीधा झटका दिया।
घटकों का ब्रेकडाउन:
• विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA): सबसे बड़ी गिरावट – 7.62 अरब डॉलर कम होकर 551.99 अरब डॉलर। डॉलर, यूरो, पाउंड, येन जैसे मूल्यों में उतार-चढ़ाव जिम्मेदार।
• सोने के भंडार: 2.06 अरब डॉलर घटकर 111.26 अरब डॉलर।
• विशेष आहरण अधिकार (SDR): 2.5 करोड़ डॉलर कम होकर 18.78 अरब डॉलर।
• IMF रिजर्व पोजीशन: 10.5 करोड़ डॉलर गिरकर 4.77 अरब डॉलर।
आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती चुनौतियां
ये आंकड़े साफ बयान देते हैं कि ट्रंप के टैरिफ संकेत और वैश्विक तनाव भारत की आर्थिक स्थिरता पर भारी पड़ रहे हैं। निर्यात प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार और RBI को रिजर्व स्थिरता के लिए सतर्क रणनीति अपनानी होगी। बाजार भी इस अनिश्चितता से चिंतित।


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