नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने शेयर बाजार से लेकर करेंसी तक पर असर डालना शुरू कर दिया है। निर्यातकों का मानना है कि दोनों देशों को आमने-सामने बैठकर बातचीत कर एक लाभकारी व्यापार समझौता करना चाहिए। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% शुल्क पहले ही निर्यात को प्रभावित कर रहे हैं।
निर्यातकों की चिंता और समाधान का आह्वान
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि संवाद ही गतिरोध तोड़ सकता है। चमड़ा क्षेत्र के एक निर्यातक ने जोर दिया कि अमेरिका भारत का प्रमुख बाजार बना हुआ है। भले ही कंपनियां नए बाजार तलाश रही हों, लेकिन अमेरिकी बाजार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ट्रेड डील से निर्यात को नई गति मिलेगी।
इंजीनियरिंग क्षेत्र के निर्यातक ने बताया कि द्विपक्षीय समझौता अनिश्चितताओं को कम कर निवेश और निर्यात दोनों के लिए अनुकूल माहौल बनाएगा।
नीतिगत चुनौतियां और जोखिम
आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने चेताया कि तनाव को केवल कूटनीति का परिणाम मानना गलत है। देरी के पीछे कठिन नीतिगत विकल्प और गहरी असहमतियां हैं। इन्हें न सुलझाया गया तो दुनिया की महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारी कमजोर हो सकती है।
हर सेक्टर पर नकारात्मक असर
यदि शुल्कों में और वृद्धि हुई तो दिल्ली से वाशिंगटन जाने वाले निर्यात पर गंभीर चोट पहुंचेगी। निर्यातक संगठनों ने तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की है ताकि दोनों देशों के हित सुरक्षित रहें। बाजार भी इस अनिश्चितता से प्रभावित हो रहा है।


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